Lord Shiva

शिव भी तुम शक्ति भी तुम, मेरे अंतर्मन का अहसास भी तुम, असीम ऊर्जा हो तुम, विज्ञान के मूल में तुम, कला के श्रृंगार हो तुम, ध्यान की मुद्रा में दुनिया छुपा लेते, नयन खुले तो एक क्षण में सृष्टि बदल देते, मनुष्य को माया में फंसा देते जो माया से बच जाए उसे स्वयं में समा लेते। वर्णन से परे हो , अहसास ही मानो सबसे खूबसूरत हो, मित्र हो , प्रेम भी हो, जगती दुनिया में नहीं मिले तो मेरी रात में हो। उदासी भरी जिंदगी में सिर्फ सोचने से ही रंग भर दो वो हो तुम। कभी ऊर्जा में हो कभी द्रव्यमान में हो तुम। लेखनी उठाए तो मेरे भावों में हो तुम। आरज़ू तो बहुत है मेरी लेकिन जब दिल से पूछो मूलभूत इकाई हो तुम। क्यों रूक गयी मैं, अच्छा मेरी बढ़ती धड़कन में मुझे अपने अस्तित्व को बताने वाले हो आप, कभी कभी मेरी आपसे मिलने की चाहत को मेरी लेखनी बनाने वाले हो आप। प्रेम और श्रृद्धा (तुम/आप) के कर्णधार हो आप।।--इला जोशी

Comments

Popular posts from this blog

Truth of life

जन्म और मृत्यु

मेरे अनुभव