life

मेरे अनुभव आत्मा का आना और जाना सत्य है।। गीता का ज्ञान सत्य है। ऊर्जा का संरक्षण का नियम भी सत्य है।। यह परिलक्षित करता है पुनर्जन्म भी निश्चित ही होगा। ऊर्जा ही द्रव्यमान देती हैं। यह कहा जा सकता है इस संसार में हमारा आना और जाना लगा रहता है लेकिन आकार अलग है आत्मा एक ही है। हम जन्म के बन्धन से तभी छूट सकते हैं जब हम एक प्रकाश पुंज/ईश्वर में मिल जाये ।जिसका रास्ता हमारे मन से होकर जाता है। वह अनुभव आनन्दमय होगा। आत्मा का आना और जाना सत्य है।। गीता का ज्ञान सत्य है। ऊर्जा का संरक्षण का नियम भी सत्य है।। यह परिलक्षित करता है पुनर्जन्म भी निश्चित ही होगा। ऊर्जा ही द्रव्यमान देती हैं। यह कहा जा सकता है इस संसार में हमारा आना और जाना लगा रहता है लेकिन आकार अलग है आत्मा एक ही है। हम जन्म के बन्धन से तभी छूट सकते हैं जब हम एक प्रकाश पुंज/ईश्वर में मिल जाये ।जिसका रास्ता हमारे मन से होकर जाता है। वह अनुभव आनन्दमय होगा। इला

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एक अन्धकार से दीप्तिमान संसार फिर एक अन्धकार, नश्वर जीवन में एक अभिलाषा, पूर्वनिश्चित एक चक्र, क्या जीवन का अन्त एक नया प्रकाश भरता होगा। हमारी आत्मा हर एक तथ्य और तर्क समाहित किये है। क्या इस नियत जीवन को चलाने के लिए आत्मा और मस्तिष्क को जोड़ने का कोई माध्यम नहीं सिवाय ध्यान मार्ग के, क्या ध्यान एक ऊर्जा को उचित दिशा में निर्देशित करने का माध्यम है। क्या अभी कोई भी उचित मार्ग तक नहीं पहुंच पाए जो प्राचीन समय में ऋषि मुनियों ने खोज निकाला था। क्या हम स्वयं को जानने की ललक रखते हैं। जीवन का सत्य रोचक होगा या हमसे जुड़ी एक छोटी सी पहेली?--इला जोशी

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