Life

एक अन्धकार से दीप्तिमान संसार फिर एक अन्धकार, नश्वर जीवन में एक अभिलाषा, पूर्वनिश्चित एक चक्र, क्या जीवन का अन्त एक नया प्रकाश भरता होगा। हमारी आत्मा हर एक तथ्य और तर्क समाहित किये है। क्या इस नियत जीवन को चलाने के लिए आत्मा और मस्तिष्क को जोड़ने का कोई माध्यम नहीं सिवाय ध्यान मार्ग के, क्या ध्यान एक ऊर्जा को उचित दिशा में निर्देशित करने का माध्यम है। क्या अभी कोई भी उचित मार्ग तक नहीं पहुंच पाए जो प्राचीन समय में ऋषि मुनियों ने खोज निकाला था। क्या हम स्वयं को जानने की ललक रखते हैं। जीवन का सत्य रोचक होगा या हमसे जुड़ी एक छोटी सी पहेली?--इला जोशी

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