life

मेरे अनुभव आत्मा का आना और जाना सत्य है।। गीता का ज्ञान सत्य है। ऊर्जा का संरक्षण का नियम भी सत्य है।। यह परिलक्षित करता है पुनर्जन्म भी निश्चित ही होगा। ऊर्जा ही द्रव्यमान देती हैं। यह कहा जा सकता है इस संसार में हमारा आना और जाना लगा रहता है लेकिन आकार अलग है आत्मा एक ही है। हम जन्म के बन्धन से तभी छूट सकते हैं जब हम एक प्रकाश पुंज/ईश्वर में मिल जाये ।जिसका रास्ता हमारे मन से होकर जाता है। वह अनुभव आनन्दमय होगा। आत्मा का आना और जाना सत्य है।। गीता का ज्ञान सत्य है। ऊर्जा का संरक्षण का नियम भी सत्य है।। यह परिलक्षित करता है पुनर्जन्म भी निश्चित ही होगा। ऊर्जा ही द्रव्यमान देती हैं। यह कहा जा सकता है इस संसार में हमारा आना और जाना लगा रहता है लेकिन आकार अलग है आत्मा एक ही है। हम जन्म के बन्धन से तभी छूट सकते हैं जब हम एक प्रकाश पुंज/ईश्वर में मिल जाये ।जिसका रास्ता हमारे मन से होकर जाता है। वह अनुभव आनन्दमय होगा। इला

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जीवन भी कितना भिन्न है—दिखता कुछ है, होता कुछ और है। हम स्वयं से प्रश्न करें: क्या हम सही हैं? क्या हम निःस्वार्थ प्रेम करते हैं, या कहें, क्या हमें दूसरों की परवाह है? क्या हम स्वयं से पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं? क्या हम अपनी खुशी से पहले दूसरों को प्राथमिकता देते हैं? क्या हम रिश्तों में प्यार भरने के लिए स्वयं भी कुछ करते हैं? हम स्वयं को ही नहीं जानते, बस उम्मीदें बढ़ती रहती हैं। जीवन की कठिनाइयाँ इसे जटिलताओं की ओर ले जा रही हैं। मनुष्य का स्वयं पर ध्यान न देना एक समस्या बनता जा रहा है, जो जीवन की मधुरता को समाप्त कर देगा। एक दिन ऐसा आएगा जब सब केवल दूसरों से अपेक्षाएँ करते रह जाएँगे और रिश्ते खत्म हो जाएँगे। आज के युग में रिश्ते दिल से खत्म हो रहे हैं; कुछ समय बाद सब इसे स्वीकार कर अलग-अलग जीवन जीने लगेंगे। इसका जिम्मेदार हम स्वयं हैं, जो बुरी तरह स्वार्थी बनते जा रहे हैं। प्रेम का अभाव है—मोह तो बहुत है, पर प्रेम की परिभाषा हम भूल गए हैं। — इला

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